Sunday, October 11, 2009

फिर किसी से दिल लगाया जाएगा

अब नया दीपक जलाया जाएगा
फिर किसी से दिल लगाया जाएगा

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा

रस्म-ए-रुखसत को निभाने के लिए
फूल आँखों का चढ़ाया जाएगा

कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा

आईना सूरत बदलने जब लगे
ख़ुद को फिर कैसे बचाया जाएगा

मेरी अलबम कुछ करीने से लगे
उनको पहलू में बिठाया जाएगा

39 comments:

राज भाटिय़ा October 11, 2009 at 1:38 AM  

मेरी अलबम कुछ करीने से लगे
उनको पहलू में बिठाया जाएगा
आप की गजल के सभी शॆर बहुत सुंदर लगे.
धन्यवाद

परमजीत बाली October 11, 2009 at 1:44 AM  

बहुत बढिया गजल है।बधाई।

Udan Tashtari October 11, 2009 at 1:50 AM  

आईना सूरत बदलने जब लगे
ख़ुद को फिर कैसे बचाया जाएगा


-बहुत उम्दा बात!

बेहतरीन गज़ल!

Anil Pusadkar October 11, 2009 at 1:52 AM  

वाह क्या बात है।बेहतरीन्।

महफूज़ अली October 11, 2009 at 1:57 AM  

कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा

yeh lines bahut achchi lagin...............

bahut hi bhaavpoorna kavita hai...........

अजय कुमार झा October 11, 2009 at 1:58 AM  

जिस दिन हमें दिया जायेगा इक घाव,
और फ़िर उन्हें नहीं सहलाया जायेगा,

खुदा कसम आप करें न करें यकीन,
मरहम के लिये इन गज़लों को गाया जायेगा..

श्रद्धा जी ...बहुत ही उम्दा लिखा आपने ..और मैंने तो अपनी आदत के अनुसार उसमें कुछ जोड दिया

अर्कजेश October 11, 2009 at 2:14 AM  

मन्द पवन सी बहती है गज़ल
तहे दिल से सराहा जायेगा

mehek October 11, 2009 at 2:21 AM  

रस्म-ए-रुखसत को निभाने के लिए
फूल आँखों का चढ़ाया जाएगा waah lajawab

dr. ashok priyaranjan October 11, 2009 at 3:15 AM  

behtareen gazal. umda sher.

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा

योगेश स्वप्न October 11, 2009 at 7:40 AM  

shradha ji behatareen gazal/lajawaab sher.dheron badhai.
कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा

kaash ye baat mayawati c.m. u.p. ko samajh aa jaaye.

M VERMA October 11, 2009 at 10:32 AM  

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा
सुन्दर ज़ज्बा, बेह्तरीन गज़ल

अशोक मधुप October 11, 2009 at 11:16 AM  

शानदार गजल

Yogesh October 11, 2009 at 2:37 PM  

Bahut badhia Shraddha ji...

बेहतरीन !!!

दिगम्बर नासवा October 11, 2009 at 2:55 PM  

मेरी अलबम कुछ करीने से लगे
उनको पहलू में बिठाया जाएगा

KAMAAL KE SHER HAIN SAB KE SAB AAPKI GAZAL KE ...
BEHATREEN GAZAL HAI ...

गौतम राजरिशी October 11, 2009 at 8:37 PM  

पढ़ते मैं आपकी इस ग़ज़ल को "अपने होठों पर सजाना चाहता हूं" की धुन पर गाने लगा...

सुंदर बनी है मैम, विशेष कर ये शेर खूब पसंद आया "मेरी अलबम कुछ करीने से लगे / उनको पहलू में बिठाया जाएगा"...एकदम अनूठा शेर है।

संजीव गौतम October 11, 2009 at 10:24 PM  

आईना सूरत बदलने जब लगे
ख़ुद को फिर कैसे बचाया जाएगा
बेहतरीन शेर.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक October 11, 2009 at 11:07 PM  

पीना पड़ेगा अगर ज़हर भी कभी
पी लूंगी अमृत समझ सिर्फ़ तुम्हारे लिये।

रहेगी जब तलक जिन्दगानी मेरी
जीऊंगी मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारे लिये।

श्रद्धा जी!
बहुत सच्चे अशआर पेश किये हैं आपने।
बधाई!

ujjwal subhash October 13, 2009 at 12:14 PM  

श्रधा जी क्या बात हैं .........बहुत ही अच्छी लगी आप कि ये प्यारी सी नज़्म बहुत इमानदारी से एक एक शब्द लिया हैं इस संयोजन मैं बहुत मुबारक हो .......

राजीव तनेजा October 13, 2009 at 12:58 PM  

कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा

बहुत बढिया..
चाहत नहीं है रुत्बे की औ पैसे की

ख्वाहिश है तो बस इतनी कि
मरने के बाद तो कम से कम
शोहरत और जन्नत मिले

Science Bloggers Association October 14, 2009 at 3:28 PM  

रूमानी जज्बों की सुंदर अभिव्यक्ति।
----------
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योगेन्द्र मौदगिल October 15, 2009 at 9:55 AM  

आपकी बेहतरीन ग़ज़लों में से एक......
वाहवा.... वाहवा...

Pramod Kumar Kush 'tanha' October 15, 2009 at 8:01 PM  

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा

bahut umda ghazal kahii hai...harik she'r khoobsoorat hai...gun-gunane ko dil karta hai...aur gun-guna bhi rahay hein...
bahut badhayee...

सुलभ सतरंगी October 16, 2009 at 1:25 PM  

आईना सूरत बदलने जब लगे
ख़ुद को फिर कैसे बचाया जाएगा

बहुत अच्छे शेर....
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आपको दीपावली की शुभकामनायें !!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

श्याम कोरी 'उदय' October 17, 2009 at 3:04 PM  

"आओ मिल कर फूल खिलाएं, रंग सजाएं आँगन में

दीवाली के पावन में , एक दीप जलाएं आंगन में "

......दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ |

manu October 17, 2009 at 9:14 PM  

shaandaar ghazal padhaai hai ji aapne...

diwaali ke mauke par....

aapko parw ki bahut bahut badhaai

सतीश सक्सेना October 19, 2009 at 10:02 PM  

बहुत बढ़िया श्रद्धा जी !, नए अंदाज़ के लिए शुभकामनायें !

Dr. Amar Jyoti October 21, 2009 at 7:28 PM  

'चाँद गर…'
'आईना सूरत बदलने…'
बहुत ख़ूब! बधाई।

singhsdm October 22, 2009 at 2:41 PM  

आईना सूरत बदलने जब लगे
ख़ुद को फिर कैसे बचाया जाएगा

मेरी अलबम कुछ करीने से लगे
उनको पहलू में बिठाया जाएगा
सारी रचनाएँ अच्छी......
बहुत शानदार ....................बधाई

निपुण पाण्डेय October 25, 2009 at 2:56 PM  

कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा

वाह .....क्या बात कही है आपने ...


मेरी अलबम कुछ करीने से लगे
उनको पहलू में बिठाया जाएगा

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ....

Nirbhay Jain October 26, 2009 at 3:05 AM  

बहुत खूब लिखा है
"कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा "


अति सुन्दर
बधाई!

Pankaj Upadhyay November 3, 2009 at 10:31 AM  

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा

yahi right attitude hona chhaiye jo mera bilkul hi nahi hai :P ...

Mrs. Asha Joglekar November 5, 2009 at 8:45 AM  

खूब लिखा है । पर लोग तो आजकल अपने बुत खुद ही बना रहे हैं ।

आवेश November 9, 2009 at 11:43 PM  

sirf yahi kahunga 'tamam safhe kitaabon ke fadfadane lage ,kabhi hawa ki tarah tum bhi aaya jaya karo',sundar ghajal

संजय भास्कर January 8, 2010 at 3:17 PM  

पढ़ते मैं आपकी इस ग़ज़ल को "अपने होठों पर सजाना चाहता हूं" की धुन पर गाने लगा...

skd January 13, 2010 at 12:36 PM  

श्रद्धा जी ,
मैंने आपसे दोस्ती की ,फिर एक कवी दोस्त को पाया और हिंदुस्तान में आपके स्वागत ना करपाने के लिए आपसे नाराज हुआ ....... पर अब आपसे दूर रहकर आपको देखना चाहता हू आपको पढना चाहता हू आपकी रचनाओ में खो जाना चाहता हू ऐसा लगता हें की ये रचना ना होकर जीती जगती खुद श्रद्धा मेरे सामने हो ...मेरी साड़ी शुभकामना तुम्हारे लिए हें साथी ऐसेही लिक्ति रहो और मै ...........

Dileepraaj Nagpal January 18, 2010 at 5:02 PM  

कर भला कितना भी दुनिया में मगर
मरने पे ही बुत बनाया जाएगा


Waah...Waah...

kishor kumar khorendra January 28, 2010 at 6:37 AM  

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा

sundar

Ashok February 23, 2010 at 3:10 PM  

श्रद्धा जी!
बधाई!

प्रदीप कांत April 23, 2010 at 10:41 PM  

चाँद गर साथी न मेरा बन सके
साथ सूरज का निभाया जाएगा

अच्छा है....

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