Thursday, July 30, 2009

रब अता करे

आदरणीय गुरु प्राण शर्मा जी की सलाहियतों के बगैर ये ग़ज़ल पूरी होना संभव नहीं था
उनके इस स्नेह और आशीर्वाद के लिए मैं जीवन भर अभारी रहूंगी

हो एक ऐसा शख्स जो, मोहब्बत-ओ-वफ़ा करे
उठाए हाथ जब भी वो, मेरे लिए दुआ करे


अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे


मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे


हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पडूँ, तो एकटक तका करे


हो पूरे ख्वाब कब, नहीं ये “श्रद्धा” जानती मगर
कज़ा से पहले चार दिन, खुशी के रब अता करे

Beh'r = 1212 x 4

53 comments:

कुलदीप "अंजुम" July 30, 2009 at 11:10 PM  

हो पूरे ख्वाब कब, नहीं ये “श्रद्धा” जानती मगर
कज़ा से पहले चार दिन, खुशी के रब अता करे
wahhh
bade hi hasin khayalat hain di
aise log kismat vale hi hote hain
aur ye thi ek badhiya gazal
congrats

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र July 30, 2009 at 11:21 PM  

हो एक ऐसा शख्स जो, मोहब्बत-ओ-वफ़ा करे
उठाए हाथ जब भी वो, मेरे लिए दुआ करे

श्रद्धा दीदी
बहुत बढ़िया रचना . बधाई.

NEER July 30, 2009 at 11:32 PM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे

1 pyar ka ehsas ....

bhut khub sharda ji....

as always ......

Ravi Shankar July 30, 2009 at 11:42 PM  

मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे...

bahut achchhi gahzal, pyaare ehsaason se bhari hui....

bahut khoob....

अनिल कान्त : July 30, 2009 at 11:43 PM  

बेहद खूबसूरत रचना है

M VERMA July 31, 2009 at 12:30 AM  

हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पढ़ुँ, तो एकटक तका करे
==
बहुत मासूम है ये रचना
वाह

श्यामल सुमन July 31, 2009 at 12:31 AM  

बस एक बात - मुग्ध हो गया श्रद्धा जी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

डॉ. मनोज मिश्र July 31, 2009 at 12:41 AM  

हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पढ़ुँ, तो एकटक तका करे...
बेहद खूबसूरत.

ओम आर्य July 31, 2009 at 12:51 AM  

atisundar .......our kya kahe .....ek ek panktiyan nagine hai..

Mithilesh dubey July 31, 2009 at 1:03 AM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे

ati sundar rachna

राजीव तनेजा July 31, 2009 at 3:26 AM  

हो एक ऐसा शख्स जो, मोहब्बत-ओ-वफ़ा करे
उठाए हाथ जब भी वो, मेरे लिए दुआ करे

बहुत बढिया

श्याम सखा 'श्याम' July 31, 2009 at 3:49 AM  

मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे
आइने शब्द ने जहां भावों को गहराई अता की है वहीं
सोच की ऊंचाइयों ने इसे खूबसूरती अता की है,बधाई
श्याम सखा श्याम

श्याम कोरी 'उदय' July 31, 2009 at 7:01 AM  

... प्रसंशनीय गजल, बधाईंयाँ !!!

योगेन्द्र मौदगिल July 31, 2009 at 8:39 AM  

बेहतरीन.... वाहवा..

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी July 31, 2009 at 11:44 AM  

"मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे


हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पढ़ुँ, तो एकटक तका करे"

umda sher...bahut achchhi rachna lagi..
bhagwaan aap ki manokamna puri kare....

PrakashYadav July 31, 2009 at 11:45 AM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे

Wahhh....

Bahut Kgobb aur utna hi khoobsurat andaaz.......

"अर्श" July 31, 2009 at 12:07 PM  

वाह श्रधा जी वाह क्या खूब ग़ज़ल कही है आपने ग़ज़ल पितामह के छाँव के तले ,... मतला जिस कमाल की बात से आपने कही है वो तो अलग से दाद मांग रहा है इस पे करोडो दाद खड़े होकर बेलेलान ...मगर एक ये शे'र उफ्फ्फ्फ़ ... क्या खूबसूरती से कही है आपने क्या शरारत रखी है क्या नजाकत है क्या मासूमियत है ... वाकई..गौर करें आप भी...

हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पढ़ुँ, तो एकटक तका करे

कमाल कर दिया आपने थोडा जल्दी जल्दी आया करें आप...

आपका
अर्श

Science Bloggers Association July 31, 2009 at 6:24 PM  

Hamesha ki tarah shaandaar.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Raj July 31, 2009 at 8:42 PM  

Bahut hi marum chhipa hai aapki is.....Gazzal me.

दिगम्बर नासवा July 31, 2009 at 9:05 PM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे

क्या खूब है आपकी ग़ज़ल........... खिलता हुवा गुलाब जैसे......... प्राण जी का निखार इसमें चार चाँद लगा रहा है

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) July 31, 2009 at 9:20 PM  

बहुत खूब श्रधा जी क्या बात है ,,, वैसे तो आप की हर रचना में ही ,,
बहुत गहराई होती है और शब्दों का सयोंजन भी आप बहुत खूब करती है ,,
पर आप की इस गजल ने मेरा मन मोह लिया अद्भुद है ,,
ये शेर तो बहुत खूब बन पड़ा है ,,
अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे
मैं नत मस्तक हूँ
मेरा प्रणाम स्वीकार करे
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

‘नज़र’ July 31, 2009 at 10:43 PM  

बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल!

योगेश स्वप्न August 1, 2009 at 12:16 AM  

wah shradha ji, sabhi sher dil ko chhote hue.

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे

bachpan ki yaad dilata masoom sher wah.

ललितमोहन त्रिवेदी August 1, 2009 at 12:23 PM  

बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है आपने ! हँसना और हँसाना कुदरत की बहुत बड़ी नियामत है श्रृद्धा जी ! किसी के ओठों पर मुस्कान ला देना इबादत है ,आपके दो शेर इसी हँसी पर केन्द्रित हैं !
अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे
हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पढ़ुँ, तो एकटक तका करे
किसी के अकेलेपन को अपनी हँसी में समेटनेवाले औरउसके ओठों पर हँसी देखकर निहाल हो जाने वाले की कल्पना को बेहद खूबसूरती से बयां किया है आपने ! आपके इस विचार पर मुझे अपनी ग़ज़ल का एक शेर याद आ रहा है !
" ज्ञान कमाया जो रट रट कर , पुण्य कमाए जो डरकर , उसकी एक हँसी के आगे वे सब के सब न्यौछावर "

ssujjwal August 1, 2009 at 11:45 PM  

हो एक ऐसा शख्स जो, मोहब्बत-ओ-वफ़ा करे
उठाए हाथ जब भी वो, मेरे लिए दुआ करे
wah!!!bade dino bad aap ko eshtara romantic andaz mai padha hai...

हो पूरे ख्वाब कब, नहीं ये “श्रद्धा” जानती मगर
कज़ा से पहले चार दिन, खुशी के रब अता करे
wahhh !!! kya bat hai....

हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पढ़ुँ, तो एकटक तका करे...
बेहद खूबसूरत.
wahh aap ke andaz to ahut pasand aaya ....!!!

संजीव गौतम August 2, 2009 at 12:01 AM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे
इस शेर में आपने जो जो चित्र खींचा है उसके क्या कहने. वाह! पूरी ग़ज़ल शानदार है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक August 2, 2009 at 2:19 PM  

"हो पूरे ख्वाब कब, नहीं ये “श्रद्धा” जानती मगर
कज़ा से पहले चार दिन, खुशी के रब अता करे।"

तुमसे ये इल्तिजा है मेरी साहब-ए-खुदा,
हाफिज मुआफ करना, मेरा दिल ख़ता करे।

शेर के लिए गुस्ताखी माफ करे।
आपकी बहुत बढ़िया मज़ल है।

Pakhi August 2, 2009 at 5:28 PM  

Beautiful Poetry !!

Happy Friendship day.....!! !!!!

पाखी के ब्लॉग पर इस बार देखें महाकालेश्वर, उज्जैन में पाखी !!

Pramod Kumar Kush 'tanha' August 2, 2009 at 6:16 PM  

मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे

wah !!! bahut khoob...

आकांक्षा~Akanksha August 2, 2009 at 6:29 PM  

Dil se nikali masum abhivyaktiyan...khubsurat bhav.

फ्रेण्डशिप-डे की शुभकामनायें. "शब्द-शिखर" पर देखें- ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे !!

भूतनाथ August 2, 2009 at 8:18 PM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे


मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!आप लिखती रहो यूँ ही....हम दुआ करें.....!!आप दुआ करो सबके लिए.....हम आपके लिए दुआ करें...!!इन शब्दों से खिल जाएँ सब तरफ़ फूल ही फूल.....खिजां में फिर जो होता है किसी की बला से हुआ करे....!!

Mumukshh Ki Rachanain August 2, 2009 at 10:52 PM  

जिस ग़ज़ल में हर शेर में मोती पिरोये गये हो उस ग़ज़ल के क्या कहने...........

हर शेर एक से बढ़ कर एक.

रब आपकी ख्वाहिसें पूरी करे......................

एक अच्छी और ह्रदय को छू जाने वाली रचना पर हार्दिक बधाई.

Babli August 3, 2009 at 8:36 AM  

मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और सुंदर टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! अब तो मैं आपका फोल्लोवेर बन गई हूँ इसलिए आती रहूंगी!मेरे अन्य ब्लोगों पर भी आपका स्वागत है!

प्रकाश गोविन्द August 3, 2009 at 3:28 PM  

रेशमी ज़ज़बात शब्दों में पिरो दिए हैं आपने...
बेहद खूबसूरत ग़ज़ल ...वाह..वाह


अनुभूति के स्तर पर हर शेर बेहद प्रभावित करता है !
दिल खुश हो गया जी !


शुभकामनाएं

आज की आवाज

Udan Tashtari August 3, 2009 at 8:44 PM  

मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे


-बहुत बढ़िया रचना .खूबसूरत.

संदीप शर्मा August 3, 2009 at 10:28 PM  

अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे


मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे

bahut hi khoobsurat rachna hai...

PRAN SHARMA August 4, 2009 at 11:50 PM  

SHRDDHA JAIN JEE EK UBHARTEE HUEE
GAZALKARA HAIN.UNKEE JITNEE GAZALEN MAINE PADHEE HAIN,SABKEE SAB MUJHE ACHCHHEE LAGEE HAIN.GAZAL
KAHNE KAA UNKAA APNA ANDAAZ HAI,
BAHUT HEE ANOOTHA AUR PYARA.UNKEE YE GAZAL BHEE ANOOTHEE HAI,PYAAREE
HAI AUR DIL KO CHHOTEE HAI.
BHAVISHYA MEIN SHRDDHA JEE BAHUT
ASHAAYEN HAIN.UMDA GAZALEN UNKEE
LEKHNI SE NIKLENGEE.MEREE SHUBH
KAMNAYEN.

Pakhi August 6, 2009 at 2:46 AM  

Are abhi apne kuchh naya post nahin kiya...koi bat nahin, fir aungin.

पाखी की दुनिया में देखें-मेरी बोटिंग-ट्रिप !!

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' August 6, 2009 at 12:01 PM  

adbhut
अकेले बैठूं जो कभी मैं, खुद को सोचती हुई
तो आँखें मूंद के मेरी, वो पीछे से हंसा करे

Vijay Kumar Sappatti August 7, 2009 at 7:24 PM  

shradha ji

bahut hi acchi gazal aur bahut se bhaav liye hue .. dil ko chooti hui ...



regards

vijay
please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

दर्पण साह "दर्शन" August 7, 2009 at 9:24 PM  

हो पूरे ख्वाब कब, नहीं ये “श्रद्धा” जानती मगर
कज़ा से पहले चार दिन, खुशी के रब अता करे...

Flawless !!


aapke blog main pehli baar aaiya hoon.(Via orkut)

blog accha laga...

almost saari ghazal padh daali....

...aap acchi ghazal likhti hain pran sharma ji ke aashjirvaad se.

गौतम राजरिशी August 7, 2009 at 11:30 PM  

मुश्किल बहर पे बेमिसाल ग़ज़ल
और ये शेर चुरा कर ले जा रहा हूँ किसी के वास्ते
"हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पडूँ, तो एकटक तका करे"

बेहतरीन ...!!!!

awaz do humko August 8, 2009 at 3:44 PM  

हो पूरे ख्वाब कब, नहीं ये “श्रद्धा” जानती मगर
कज़ा से पहले चार दिन, खुशी के रब अता करे
बहुत बढ़िया रचना . बधाई.

shama August 8, 2009 at 9:34 PM  

Sabhi rachnayen stabdh kar detee hain! Kaash..kaash..!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.com

http://lalitlekh.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://shama-baagwaanee.blogspot.com

swati August 14, 2009 at 3:36 PM  

bahut hi prabhaavkaari.......ati sundar

विनय ‘नज़र’ August 15, 2009 at 12:15 AM  

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
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INDIAN DEITIES

MUFLIS August 17, 2009 at 11:16 AM  

मुझे बताए ग़लतियाँ भी, रास्ता दिखाए फिर
वो देखे बन के आइना, हरेक पल खुदा करे

achhe khayaalaat ,
achhi raahnumaai ,
achhi peshkaari ,
bahut achhi gzl ,,,,
badhaaee .

---MUFLIS---

शाहनवाज़ August 18, 2009 at 4:13 AM  

sharadha ji bahut umda likhti hain aap...khyal behad umda hai. likhti rahiye....

Mayank September 5, 2009 at 10:29 PM  

beautiful................................

manu September 30, 2009 at 12:26 AM  

हूँ जो खफा मनाए, करके भोली सी शरारतें
जो खिलखिला के हंस पडूँ, तो एकटक तका करे

श्रद्घा जी ,
ये शे'र इतना ज्यादा पसंद आया...कह नहीं सकता...

अब दूसरी गजल ना पढ़ी जायेगी...
फिर आयेंगे...

apurn January 4, 2010 at 2:16 AM  

kai sari kaivtayen aur gazal padhi mujhe bahut achhi lagi

kishor kumar khorendra January 28, 2010 at 3:42 PM  

राजा और प्यादा में अंतर करता है जग
हर इक को इक कद में रखता है आईना

आगाज़ ग़ज़ल का कर ही दो अब “श्रद्धा” तुम
उलझा-उलझा मुझको दिखता है आईना

bahut bahut khuub

kishor kumar khorendra January 30, 2010 at 9:06 PM  

हो एक ऐसा शख्स जो, मोहब्बत-ओ-वफ़ा करे
उठाए हाथ जब भी वो, मेरे लिए दुआ करे


bahut sundar

www.blogvani.com

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