Friday, June 20, 2008

किसने जाना कि कल है क्या होगा

किसने जाना कि कल है क्या होगा
कुरबते या के फासला होगा

रोता जो जार जार उसे रोने दो
हो ना हो खुद से वो मिला होगा

चाँद जो पल में बन गया हैं धूल
उसने पैरों तले कुचला होगा

ज़ुल्म करता नहीं वो सबका रहीम
आज दुनिया का रब जुदा होगा

श्रद्धा ना यूँ सकून तलाश यहाँ
बद ओ वीरान ये रास्ता होगा


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

21 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल June 20, 2008 at 4:20 PM  

बहुत सुंदर श्रद्धा जी.. नये ब्लॉग की शुभकामनाए.. आशा है निरंतर आपकी पोस्ट आती रहेगी..

jasvir saurana June 20, 2008 at 8:44 PM  

bhut hi sundar rachana.likhate rhe. aap apna word verification hata le taki humko tipani dene mei aasani ho.

Amit K. Sagar June 20, 2008 at 10:38 PM  

खुबसूरत रचना. मज़ा आया. आपकी लेखनी वो माद्दा है जिसे दुनिया पढ़े. लिखते रहिये. शुभकामनाएं.
---
उल्टा तीर

Udan Tashtari June 21, 2008 at 6:41 AM  

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

ये लो, आपका ब्लॉग शुरु हो गया और हमें खबर भी नहीं.

मनोज कंदोई June 21, 2008 at 12:47 PM  

बहुत बहुत बधाई, ब्लाग जगत मे आपका स्वागत है, गजल पसंद आई आगे भी लिखते रहे अपने देश की मिठ्ठी कि सुगंध ही ऎसी है कि हर कोई खीचा चला आता है फिर आप तो अपने है, हिंदी ब्लाग का अपना ही अलग मजा है, आपकी पोस्ट हमेशा अच्छी मिलेगी इन्ही शुभकामनाओ के साथ.
मनोज कंदोई

Vinay Prajapati NAZAR June 21, 2008 at 5:12 PM  

bahut baDhiya!

महेंद्र मिश्रा June 22, 2008 at 12:47 AM  

Bheegi gajal
meri didi shradhdha ji
aaj apka naya blaag khoj liya apne bhai ko apne kabhi bataya nahi.
नये ब्लॉग की शुभकामनाए.लिखते रहिये.

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:42 PM  

बहुत बहुत धन्यवाद आपका कुश आपके सहयोग के बिना कुछ भी संभव नही हो पता है

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:44 PM  

जसवीर जी आपके सुझाव को मान कर कोड हटा दिया है आपको अपने ब्लॉग पर पाकर बहुत खुशी हुई
आशा है आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मिलती रहेगी

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:47 PM  

अमित आपका साथ हमेशा से ही कलम को मिलता रहा है शुक्रिया दोस्त

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:47 PM  

धन्यवाद समीर जी आप आ गये ब्लॉग धन्य हुआ
आपके साथ की हमेशा ही ज़रूरत है साथ बनाए रखिएगा

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:49 PM  

मनोज जी आपको अपने ब्लॉग पर पाकर बहुत खुशी हुई
आशा है आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मिलती रहेगी आपकी शुभकामना की ज़रूरत है साथ बनाए रखें

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:50 PM  

विनय जी आपने सराहा बहुत अच्छा लगा
आशा है आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मिलती रहेगी

श्रद्दा जैन June 22, 2008 at 12:51 PM  

भैया आपका आना दुआ की तरह है आपके आशीर्वाद के बिना कोई भी काम पूरा नहीं होता
आप आए बहुत अच्छा लगा
अपना आशीर्वाद बनाए रखिए

priti June 23, 2008 at 10:24 PM  

bahut acha likhtey hai aap .....

Kavi Kulwant June 24, 2008 at 6:15 PM  

badhaayee.. achcha likha hai..

सुशील कुमार छौक्कर June 24, 2008 at 9:34 PM  

रोता जो जार जार उसे रोने दो
हो ना हो खुद से वो मिला होगा

इन मोतियों को आप कैसे पड़क लेती हो। सुन्दर अति सुन्दर।

श्रद्धा जैन June 27, 2008 at 12:12 PM  

Priti ji bhaut bahut dhanywad aapka

श्रद्धा जैन June 27, 2008 at 12:13 PM  

Kulwant ji aapka bahut dhanaywad aapka pyaar aur saath hamesha mera housla badhata hai
saath banaye rakhiye

श्रद्धा जैन June 27, 2008 at 12:14 PM  

Sushil ji aapko blog par dekh kar bahut achha laga
aapne pasand kiya uske liye shukriya
aate rahe aapka pyaar housle ke liye zaruri hai

Duran February 22, 2013 at 11:35 PM  

अमित आपका साथ हमेशा से ही कलम को मिलता रहा है शुक्रिया दोस्त

www.blogvani.com

About This Blog